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एक टा अंतहीन रेह

ek ta anthin reh

विकास वत्सनाभ

विकास वत्सनाभ

एक टा अंतहीन रेह

विकास वत्सनाभ

और अधिकविकास वत्सनाभ

    (कवि कुलानन्द मिश्रकें समर्पित)

    एहन असंख्य स्मृति जे मूनल अछि मोनक लिफाफमे

    रहरहाँ फुजैत अछि बेतरेक

    इच्छाक निहारिकामे छोड़ि दैत अछि सगर बोहियाइत

    कविता ओहि अनंत इच्छाक

    पिपरीक लीख सन पाड़ैत अछि एक टा अंतहीन रेह

    जेना कि धारक ओहि पार सिमरक फूलमे नुकाइत साँझ

    साँझक आलिंगनमे पघिलैत ललौन सुरुज

    गोधूलिक धोन्हि बनैत अहाँक धूआ

    गरदामीक टुनटुनिया तालपर अबैत मिलनक हकार

    जेना कि ठकुरबारीमे परातक उदासी गबैत एक टा सारिका

    कनैलक ठोरपर

    नैहर जाइत तरेगनक पिरौंछ छाँह

    आँखिमे अहलभोरे फुलाइत उमेदक अपराजिता

    सिंगरहारक गाछ तर

    प्रणयक लुकझुकाइत इजोतकें अन्हार करैत भोर

    जेना कि एक टा दिन भरि नबगछुली कोइली

    लजमन्ति नवकनियाक घोघ उड़ेबाक बसातक बतहपनी

    देओर सभक आँखिमे

    सिनेहक फुलाइत एक टा रक्तिम गुलाब

    बच्चा सभक बौगलीमे लालसाक गीत गबैत रेजकी

    ओछाइनपर बाट तकैत अहाँक बनाओल एक जोड़ी सुग्गा

    जेना कि राति बदरिआयल अकास तर

    बिजलोकाक बंकिम इजोतमे

    सोनपाखी सन चमकैत अहाँक दाप

    चानक बाट हेरैत कुमुदिनी सन आकुल अहाँक ठोर

    कटिप्रदेश धरि सोहराइत

    अहाँक फूजल केश तीरैत हमर आबेस

    अपन ठोरक पिहुआसँ

    अहाँक समुच्चा देहपर प्रीतक अरिपन लिखबाक हमर सिहन्ता

    जेना कि इहो जे मिलनक विरोधमे होइत दुरभिसंधिक संग

    कति सोड़हि आँखिक पहरा

    बसबिट्टीमे जिनगीक सोहर गबैत चिड़ै-चुनमुनीक अछैत

    कतेको अवसादित कान

    मातल बसातमे सिहकैत प्रेमक सतरंगी पतक्खाकें

    नोबाक लेल बिर्त कतेको हाथ

    एहन आओर बहुत किछु जे मूनल अछि मोनक लिफाफमे

    कविता ओहि अनंत इच्छाक

    पिपरीक लीख सन पाड़ैत अछि एक टा अंतहीन रेह

    स्रोत :
    • पुस्तक : नेपथ्यसँ अबैत हाक (पृष्ठ 37)
    • रचनाकार : विकास वत्सनाभ
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2025

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