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एक पादटिप्पणी

ek padtippni

अनुवाद : सुरेश सलिल

स्टीफन स्पेंडर

स्टीफन स्पेंडर

एक पादटिप्पणी

स्टीफन स्पेंडर

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    (मार्क्स की रचना ‘डास कैपिटल’ के कार्य-दिवस अध्याय पर)

    'कहते हुए सुना कि चार चौके आठ होते हैं

    'और यह कि राजा वह व्यक्ति है जिसके पास सारा सोना रहता है'

    'और हमारा राजा एक महारानी है और उसका बेटा एक राजकुमारी

    'और वे लंदन नाम के एक महल में रहते हैं, मुझे बताया गया।'

    'कहते हुए सुना कि एक आदमी जिसे ईश्वर कहकर पुकारा जाता है

    'वह एक कुत्ता है, बनाई यह दुनिया, उसमें मुझे शामिल करके।

    'और फिर मैंने सुना कि एक महा सैलाब आया और समूची दुनिया

    'उसमें डूब गई, एक आदमी को छोड़कर, और वह आदमी एक

    चिड़िया था।'

    'शायद सभी लोग मरे हुए हैं और हम चिड़ियाँ हैं

    'इस्पात के एक पिंजड़े में बंद की गई; शैतान द्वारा, जो भला है,

    'और खनिकों को उनके खदान-पिंजड़े में

    'और हमें अपनी चिमनियों में चढ़ना है, जो उचित ही है।'

    —आह, चिंचियाती आवाज़ें बच्चों की,

    नीली किताबों, इतिहासों के ख़चाख़च भरे पृष्ठों के

    निचले हिस्सों पर घुटनों के बल घिसटती,

    तुम एक गानहीन युग की चिड़ियाँ हो

    सबसे छोटे ईश्वरों-जैसे छोटे, सदैव काल्पनिक बचपन से पुरस्कृत।

    प्रायः सूर्यास्त के वक़्त लंदन के ऊपर

    दिखाई देते हैं मुझे पर्दों की तरह खिंचे बादल

    उस आसमान को प्रदर्शित करने के लिए

    जिसमें एक जड़ और अज्ञानी युग के अदना पदक

    और भोले-स्वस्थ शिशु तिरते हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 230)
    • रचनाकार : स्टीफन स्पेंडर
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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