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एक कविता

ek kavita

नूर आलम नूर

नूर आलम नूर

एक कविता

नूर आलम नूर

और अधिकनूर आलम नूर

    मैं जब भी सोचता हूँ एक कविता के बारे में

    आसमान में गोता लगाती

    याद आती है

    एक गौरइया

    गौरइए के बारे में सोचते हुए

    याद आते हैं उसके बच्चे, उनके सपने,

    सपनों के साथ-साथ उनकी भूख भी

    मैं जब भी सोचता हूँ एक कविता के बारे में

    याद आता है गाँव

    गाँव के बारे में सोचते हुए

    याद आती है वहाँ की मिटटी,

    उसका चूल्हा,

    उस पर पक रही रोटी के साथ-साथ उसकी महक भी

    मैं जब भी सोचता हूँ एक कविता के बारे में

    याद आते हैं रंग

    रंगो के बारे में सोचते हुए

    याद आती है माँ

    उसके चेहरे पर उगी झूर्रियों के साथ-साथ

    याद आती है उसके माथे कि लाल टिकुली

    मैं जब भी सोचता हूँ उस टिकुली के बारे में

    सोचने लगता हूँ

    इस दुनिया के बारे में

    इस दुनिया के माथे पर लगा सकूँ

    एक लाल टिकुली

    इस ख़्याल के पनपते ही

    मैं बैठ जाता हूँ लिखने

    एक कविता

    स्रोत :
    • रचनाकार : नूर आलम नूर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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