और वह कौशल, जिसने रचा एक झलक
मौरिस : सिगुर्द बोलसुंग, 1876
मैं सोच रहा हूँ एक शेर के बारे में। उपच्छाया में कितना उन्नत हो जाता है
वह विशाल समृद्ध पुस्तकालय
और किताबी शेल्फ़ सब दूर हुए जाते हैं;
ताक़तवर, मासूम, ख़ून में लिपटा और नया,
वह घूमेगा अपने जंगल में, अपनी सुबह में
और अंकित करेगा अपने क़दमों के निशान
एक नदी के गीले किनारे पर जिसका नाम नहीं जानता वह
(उसकी दुनिया में नाम नहीं होते, न होता है अतीत
न भविष्य, होता है तो सिर्फ़ एक निश्चित पल)
और पार करेगा असीम दूरियाँ
सूँघकर ढूँढ़ निकालेगा गंधों की
इस गुँथी हुई भूलभुलैया में
भोर की गंध
और वह लुभावनी गंध हिरन की।
बाँस की लकीरों के बीच ढूँढ़ निकालता हूँ
लकीरें उसकी और महसूस करता हूँ चुनौती
उस शानदार काँपती चमड़ी के तले।
बेकार ही बीच में आते हैं दुनिया के यह
उभरे सागर और रेगिस्तान;
मैं यहाँ दक्षिणी अमरीका के इस सुदूर बंदरगाही
शहर के इस घर से, पीछा करता हूँ तेरा और देखता हूँ स्वप्न,
ओ गंगा किनारे के शेर।
फैल जाती है शाम मेरी आत्मा में और मैं सोचता हूँ
कि मेरे छंदों का यह संबोधात्मक शेर,
शेर है प्रतीकों और छायाओं का,
साहित्यिक अलंकारों के सिलसिले का
विश्वकोश की आत्मकथा का
नहीं है यह वह घातक शेर, वह अभागा रत्न
जो, धूप हो या चाँदनी,
पूरा करता जाता है सुमात्रा में या फिर बंगाल में
दस्तूर प्यार का, आलस का, और मौत का।
प्रतीकों वाले शेर के मुक़ाबले में मैंने रख दिया है
सचमुच के शेर को, उस गर्म ख़ून वाले को,
जो संहार करता है भैंसों के झुंड का
और आज, 3 अगस्त सन् 59 को,
लंबी होती जाती है घास के मैदान में एक
रुकी हुई छाया, मगर उसे नाम देना
और उसके बारे में अटकल लगाना
उसे कलात्मक कल्पना बना देता है। नहीं रहता फिर वह
पृथ्वी पर घूमता एक जीवंत पशु।
हम ढूँढ़ेंगे एक तीसरा शेर। यह
होगा औरों की तरह मेरे सपनों का एक रूप,
मानव शब्दों की एक व्यवस्था
न कि वह रीढ़दार शेर
जो, पौराणिक कथाओं के परे
फिरता है ज़मीन पर। मैं यह जानता हूँ अच्छी तरह,
मगर कुछ है जो थोपता है मुझ पर यह अस्पष्ट,
पागलपन भरा पुराना जोखिम, और डटा रहता हूँ मैं
खोज में शाम के वक़्त
उस दूसरे शेर की, नहीं है जो कविता में।
- पुस्तक : यह संपन्नता बिखरी हुई (पृष्ठ 233)
- संपादक : श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
- रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
- प्रकाशन : साहित्य अकादेमी एवं ग्रूलाक
- संस्करण : 2006
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