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धातुई स्वाद

dhatui svaad

अनुवाद : उदय शंकर भट्ट

यानुष षुबेर

यानुष षुबेर

धातुई स्वाद

यानुष षुबेर

और अधिकयानुष षुबेर

    इस मौसम में

    अंतहीन परेशानी का सबब बनती थी हवा,

    नदियाँ काली हो जाती थीं

    बर्फ़ के कटाव के सहारे बने

    छिछले रास्ते चमकते थे

    स्मृति को सहलाना

    अखरोट के छिलकों में

    अखरोट ढूँढ़ना था

    उसे प्यार चाहिए था

    किसके लिए प्यार? किसलिए प्यार?

    कुत्तानुमा एक सुनहरा पट्टा, एक बोतल बियर या पुराने दिनों के अख़बार का एक रद्दी टुकड़ा

    मल्लाह की झोपड़ी में लगी एक कुंडी ही थी,

    कि एक कुत्ता गुर्राता था.

    थोड़ी देर के लिए ही सही

    उसकी जिह्वा ने

    धातुई स्वाद के उत्सव का मर्म चखा

    उसका पेट बढ़कर कंठ की ओर चला जा रहा था,

    लेकिन वहाँ कोई कंठ क्या, कुछ भी नहीं बचा था।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : यानुष षुबेर

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