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देवकी आजी

devki aaji

हर्षिता त्रिपाठी

और अधिकहर्षिता त्रिपाठी

    दूर से चप्पल उतारते हुए

    लंबे समय के बाद मिलने की

    मुस्कुराहट को समेटे

    ‘कहाँ हव बहन जी’

    आवाज़ देते

    बैठ जाती हैं बड़े प्यार से

    नीचे ज़मीन पर

    अम्मा का पैर छूकर

    ज़मीन को छूते हुए

    जय राम कर लेती है

    अम्मा चारपाई में बैठकर

    थैली लेकर पान लगाती है

    दूर से देकर पूछती है

    ‘और कुछ चहि’

    हस्ते हुए खोल देती है

    बचपन की बातों की गठरी

    ढेढिया

    कबड्डी

    पुलुलुवा

    पहटा...

    साथ मे खेले गए सभी खेल

    यादों का जमघट लग जाता है

    वे दोनों अब बूढ़ी हो गई हैं

    बचपन चला गया

    बुढ़ापे ने दस्तक दे दी है

    बदलते समय के साथ

    जिस तरीक़े रह जाते है

    अनछुए समाज के कुछ पहलू

    उन्ही पहलुओं में समाज ने

    इन्हें अछूता छोड़ा हुआ है

    छू जाने पर कपड़े बदलना पड़े

    इसलिए बिना छुए ही एक-दूसरे को

    जता लेती है उतना ही प्रेम

    जितना जता लेती थी

    साथ मे खेलने पर

    स्रोत :
    • रचनाकार : हर्षिता त्रिपाठी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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