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देवी मइया के दुआरे

devi maiya ke duare

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

देवी मइया के दुआरे

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    देवी मइया के दुआरे करैं सोर ललना।

    दियना बार-बार करबै हम अँजोर अँगना॥

    मइया तोहरे चरनन हम बार-बार सुख पाई,

    तोहरी एक दया पै माई कविकै मन हरसाई,

    झूला कदम की डारी डारे लाल पलना।

    देवी मइया...

    तोहरे घरे के चारौं ओरी धूप दिया हम बारी,

    तोरी आरती मइया हम तौ संध्या-भोर उतारी,

    छोट बड़ा सब मिलि के गावैं बजावैं बजना।

    देवी मइया...

    होत सबेरे चिरई बोलैं बोलैं कागा मोर,

    देखि देखि ललचाये मोरे मनवा के चित चोर,

    घंटी बाजै मन्दिर मा महजिद मा अजना

    देवी मइया...

    तोहरे कदम के आगे माइ सगरौ झुकै जमाना,

    तोहरे नाम कै माला माई जपत रहै परवाना,

    नीक लागै देखा आज धरती गगना

    देवी मइया...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 6)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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