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देखब हम ओहि दिन रहब

dekhab hum ohi din rahab

ललितेश मिश्र

ललितेश मिश्र

देखब हम ओहि दिन रहब

ललितेश मिश्र

और अधिकललितेश मिश्र

    (हेअर चॉक वाल फाल्स टू फोम

    एण्ड इट्स टॉल लेजेज

    ओपोज प्लक एण्ड

    नॉक ऑफ टाइड)

    छल-बलसँ बान्हल

    ठाम-ठाम दगनीसँ दागल

    हमर बाँहि एकटा अननत आकाश थिक

    जकर छाहरिमे

    समस्त भूमण्डल करैछ

    सूर्यक परिक्रमा

    उत्थान-पतन होइत अछि

    सुख-दुविधा होइत अछि।

    क्लीव, शिखण्डीक दुरभिसन्धिमे

    हमर बाँहि, मुदा, बान्हल रहैत अछि

    छल-बलसँ दागल रहैत अछि

    किन्तु, हमर बाँहि एक दिन एतेक

    मोट भऽ जायत

    एतेक पैघ बली भऽ जायत

    जे बान्हि लेत समस्त संसारकेँ

    अपन पाशमे

    जकड़ि लेत सूर्यपिण्डकेँ

    रोकि देत हवा-बसातकेँ

    देखब हम ओही दिन अहाँक

    दुरभिसन्धि प्रभावकेँ

    जे उकासी मेटयबाक लेल

    अहाँ चाहक फरमाइस करैत छी

    कि छीकैत रहि जाइत छी...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई-मिथिला
    • संपादक : बालमुकुन्द
    • रचनाकार : ललितेश मिश्र
    • संस्करण : 2020

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