माफ़ीनामा

ज्योति चावला

माफ़ीनामा

ज्योति चावला

और अधिकज्योति चावला

    सुनो मेरी बिटिया

    तुम्हारे जन्म की पाँचवीं ही सालगिरह पर

    मैं तुम्हारे कानों में कुछ कहना चाहती हूँ

    जानती हूँ मैं कि अभी छोटी हो तुम उस उम्र से

    पर बदलते वक़्त ने कहाँ छोटा रहने दिया अब बेटियों को

    बदलते वक़्त ने चौकन्ना कर दिया है स्त्रियों को

    कि वे अपने स्त्री जीवन के अनुभवों की थाती

    झट से बाँट लेना चाह रही हैं अपनी बेटियों से

    हो सके तो माफ़ करना मेरी बच्ची

    कि मेरे समय ने सबसे अधिक छीना

    तुमसे तुम्हारा बचपन

    तुम्हारे हाथों से छीन कर गुड़िया, खिलौने

    थमा दिए हैं हथियार अपनी रक्षा के

    तुम्हारी आँखों से छीन कर भोलापन, मासूमियत

    भर दिया है उनमें हिरनी का-सा चौकन्नापन

    मेरे समय में बेटियाँ लूटी जा रही हैं

    मेरे समय में बेटियाँ नोची जा रही हैं

    यहाँ-वहाँ बिखरे पड़े हैं धब्बे

    उनके ख़ून के, उनके आँसुओं के

    चाह कर भी मैं छीन रही हूँ तुमसे तुम्हारा बचपन

    और थमा रही हूँ पोटली

    तुम्हें अपने जिए अनुभवों की।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ज्योति चावला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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