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चिड़िया

chiDiya

सुमन शेखर

सुमन शेखर

चिड़िया

सुमन शेखर

और अधिकसुमन शेखर

    उस घर में बहुत-सी चिड़ियाँ केवल तीन थी

    वो, और उसके दो नन्हे जान

    नन्हे जान की सरदार घर के सबसे आगे वाले कमरे में सोती थी

    सोती थी, ताकि घर मे उगे सूरज को सबसे पहले देख सके

    और सबसे पहले जागकर

    घर के सामने लगे, गिरे आम चुनकर

    नन्हे चिड़ियों की खिड़की पर रख सके

    जिसकी ख़ुशबू से वो जागने से पहले जाग जाएँ

    रोज़ यह बस एक कोशिश ही रह जाती

    वो सोते और जागने के बहुत देर बाद तक सोए रहते

    एक दिन पेड़ पर टहलने वाली गिलहरी

    घर को पेड़ और खिड़की पर रखे आम को

    पेड़ का फल समझ

    पेड़ के रास्ते से भटककर घर के रास्ते पर गई

    और रखे आम को कुतरने लगी

    कुतरते ही आम की ख़ुशबू

    किसी बम सी पूरे कमरे की दौड़ लगाने लगी

    कि कोना छूट जाए उसकी ख़ुशबू से

    सरदार की नज़र पड़ी

    गिलहरी भाग गई

    सरदार को देखकर

    या उसका पेट भर गया!

    नन्हे चिड़िया सोए ही थे

    जाने कैसे कुतरे हुए आम की ख़ुशबू

    सरदार के आम तक पहुँचने से पहले

    नन्हें जान तक पहुँच गई

    आम के पास आती एक चिड़िया

    अचानक से तीन चिड़िया की भीड़ में बदल गई

    घुस रहे सूरज को लात मार कर, पीस-पीस कर तीनों

    आम के ख़ुशबू में चहक रहे थे

    इस दिन का, इस वक़्त में चहकना

    वर्षों बाद के पल में चहकना हो गया।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुमन शेखर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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