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चीन के नाम ( 1962 के आक्रमण पर)

cheen ke naam ( 1962 ke akrman par)

उदय प्रताप सिंह

उदय प्रताप सिंह

चीन के नाम ( 1962 के आक्रमण पर)

उदय प्रताप सिंह

और अधिकउदय प्रताप सिंह

    तू वही है जिसको हमने ज्ञान गौतम का दिया

    तू घिनौना जानवर था आदमी हमने किया

    सभ्यता के पथ पे तेरी बाँह भी हमने गही

    तेरी धरती पर हमारे ज्ञान की गंगा बही।

    कह नहीं सकते कि तुझको याद हो कि न याद हो

    हमने चाहा साथ अपने चीन भी आज़ाद हो

    हमने तुझको ज़िंदगी के जाँच कर साँचे दिए

    तेरी आँखों से जो टपके आँसू हमने ले लिए।

    तेरी भाषा, ज्ञान औ' साहित्य को टैगोर ने

    पंख सौरभ के दिए थे, ज्यों कली को भोर ने

    जन्म से लेकर अभी तक जिसके क़दमों पर चला

    अब उसी भारत का पीछे से पकड़ता है गला!

    ठीक है आज़ाद होकर बे-ख़बर हम हो गए

    तुझको भाई से भी ज्यादा जानकर हम सो गए

    पर तुझे मालूम है शायद नहीं नादान यह

    नींद में भी जागता रहता है हिंदुस्तान यह।

    देख वे दक्षिण के प्रहरी नर अभी सोये नहीं

    देख वे पंजाब के नाहर अभी सोये नहीं

    देख बंगाले के जादूगर अभी सोये नहीं

    देख राजस्थान के जोहर अभी सोये नहीं।

    हिंदसागर की घटाओं से गगन घिरने लगा

    शांत हिमगिरि के नयन से शोला-सा गिरने लगा

    हाथ रेगिस्तान का तलवार पर फिरने लगा

    आँख में इतिहास की फिर से लहू तिरने लगा।

    जब सिकंदर-से विजेता बाज़ आए हिंद से

    तुझमें क्या ताक़त है जो लोहा बजाए हिंद से

    भाग्य का मारा वही आँखे मिलाए हिंद से

    जो सहन कर ले कि उसकी लाश जाए हिंद से।

    जब कभी आती है नौबत देश के अपमान की

    हम लगा देते हैं बढ़कर बाजी अपनी जान की

    चीन तू तो चीज क्या है, बात सुन ईमान की

    तख़्ते लंदन तक चली थी तेग़ हिंदुस्तान की।

    वैसे भारत के निवासी अपने दिल से नेक हैं

    जान देना, आन रखना किंतु उनकी टेक हैं

    माना लहरों की तरह से हम अनेकानेक हैं

    पर समय पड़ने पे हम दो भी नहीं हैं, एक हैं।

    आज आया है हमें तू भय दिखाने के लिए

    प्राण जो देते हैं फिर से जन्म पाने के लिए

    सूर्य पर बदली ये झीनी देखेंगे कब तक रहे

    हिंद की धरती पे चीनी देखेंगे कब तक रहे।

    स्रोत :
    • रचनाकार : उदय प्रताप सिंह
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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