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चौकठिसँ चान दिस

chaukathisan chaan dis

दीपिका चन्द्रा

दीपिका चन्द्रा

चौकठिसँ चान दिस

दीपिका चन्द्रा

और अधिकदीपिका चन्द्रा

    नैहरसँ सासुर धरि

    अपन घर-आँगनकेँ सजबैत

    तुलसी चौरा गोसाउनि घरमे

    धूप-दीप देखबैत

    कखनहुँ भनसाघरमे व्यस्त

    तँ कखनहुँ खेत-खरिहानमे पस्त

    मिथिलाक बेटी छी हम

    मुदा एतबे नहि छी हम

    बाम हाथमे पिनाक उठौने

    दहिन हाथसँ आँगन नीपैत

    एकसरि जंगलमे रहैत

    दुनू पुत्रकेँ सभ विधामे

    पारंगत केनिहारि

    अपन युद्धकौशलसँ

    सहस्रमुख रावणक वध केनिहारि

    मिथिलाक धिया सीता छी हम

    जाहि दीपक इजोतमे

    वाचस्पति रचलनि अनेको ग्रंथ

    ताहि दीपकेँ वर्षहुँ धरि

    अपन आँचरसँ अऽढ़ कयने

    हवा-बसातसँ बचेबाक लेल

    बैसलि रहल छी हम भामती बनि

    शास्त्रार्थमे पराजित होइत

    मंडन मिश्र लेल

    हम भारती बनि भेल रही ठाढ़ि

    अर्द्धांगिनी रूपमे

    शंकरकेँ अपन प्रश्नसँ

    कयने रही विचलित निरुत्तर

    विदेहराज जनकक सभामे

    तिलमिला गेल छलाह ऋषि याज्ञवल्क्य

    जहिया हम गार्गी बनि

    ठाढ़ि भेल रही प्रश्नोत्तर लेल

    मुदा हाय रे हमर मिथिला

    तैयो नहि चीन्हि सकल

    आइ धरि अपन बेटीक सामर्थ्य

    नहि लिखल गाओल गेल

    बेटीक जन्मपर सोहर

    धिया सासुरेमे नीक

    बाद स्वर्गेमे नीक

    सन गीत पर बजबैत

    रहल अछि थोपड़ी

    हमरा बुझल अछि जे

    अहाँ सभ नहि चाहैत छी एखनो

    जे बेटी एखनहुँ बहराय

    चौकठिसँ आगू

    देहरिसँ बाहर

    जँ अहाँक मोनमे अछि

    असुरक्षाक कोनो भावना

    तँ चिन्ता नहि करू

    आब हम भावना कंठ बनि

    अकासमे उड़ा रहल छी

    युद्धक विमान देशक सुरक्षा लेल

    जँ अहाँक मोनमे अछि

    तथाकथित मर्यादा वला गप्प

    तँ बिसरि जाउ तकरा

    अहाँक धिया पढ़त-लिखत

    आगू बढ़त तँ

    कुल, गाम, समाजक

    मर्यादा बढ़बे करत सदिखन

    मोन राखू हमहूँ मनुक्ख छी

    हमरो आँखिमे अछि सपना

    हमरो हृदयमे अछि भावना

    हमहूँ ठाढ़ होअय चाहैत छी

    घर, गाम, देश के

    सभ मोर्चापर

    अपन प्रतिभा मेहनतिक बलें

    तेँ हे समाज, हे अभिभावक

    नहि तोडू हमर पाँखि

    नहि नोराबय हमर आँखि

    अपन बाटपर हमरा बढ़य दिअ

    सफलताक अकासमे उड़य दिअ

    हमरा बढ़बाक अछि

    जिनगीकेँ गढ़बाक अछि

    यात्रा करबाक अछि

    बढ़ैत रहबाक अछि

    चौकठिसँ चान दिस

    स्रोत :
    • पुस्तक : चौकठिसँ चान दिस (पृष्ठ 67)
    • रचनाकार : दीपिका चन्द्रा
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2024

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