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अंतिम साँस की तैयारी

antim saans ki taiyari

राकेश कुमार मिश्र

राकेश कुमार मिश्र

अंतिम साँस की तैयारी

राकेश कुमार मिश्र

और अधिकराकेश कुमार मिश्र

    अंतिम साँस लेने से पहले

    वह मौत पर करते थे इस तरह बात

    जैसे रंग-बिरंगे फूलों का नाज़ुक क़सीदा काढ़ रहे हों

    बड़की माँ से कहते

    अगर रात के चौथे पहर मरा

    तो मत रोना

    बस लाश को खटिया से उतार कर रख देना

    कोठरी की चिटकिनी लगा देना धीरे-से

    करना सुबह का इंतज़ार

    बड़कु सिधुआ हैं

    पटीदार परेशान करें तो

    तीनों भाई एक साथ खड़े होना

    हमरा किरिया करम में ढेर खर्चा मत करिह लोगिन

    लईका सन के पईसा बरबाद होई

    अंतिम दिनों में ईआ को मना करते रहे

    पिता को ख़बर दिया जाए

    नहीं तो परदेस में ठेके की नौकरी कर रहे होंगे परेशान

    उन्हें याद आते खेत-खलिहान, यार-दोस्त, परब-त्योहार

    महुआ टपकता रहता अतीत के आँगन में

    मित्र रहते उनके आसपास

    श्रम को गमछा की तरह ओढ़े रहे

    उनका जाना घर के छायादार पेड़ की विदाई थी

    उनके जाने के बाद

    महुआ का गाछ बहुत रोया।

    स्रोत :
    • रचनाकार : राकेश कुमार मिश्र
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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