यातना के बारे में बताए जाने पर
yatana ke bare mein bataye jane par
वहाँ एक ऐसा खाता है जिसमें
आदमी के रोयें-रोयें का हिसाब दर्ज होगा।
समय की माप रेतघड़ी से नहीं बल्कि
बहे हुए और आगे बहने वाले ख़ून के रक्तकुंडों से होती है।
हालाँकि हमारी हड्डियाँ चरमरा गई हैं
हमारी आत्माएँ नहीं टूटेंगी
जब तक कि इतिहास की लाल चमकीली किताब में
हम अपनी गिनती नहीं दर्ज करा लेते।
उसने कहा कि उसे उसने फ़र्श पर
अपने ही ख़ून में लिथड़ा पड़ा देखा—
बेहोशी की बकझक दर्द से राहत का उसका एक बहाना था।
वैसी हालत में माँ मेरी बाँह पकड़ेगी
और किसी हुकूमत को नेस्तोनामूद करने को प्रेरित करेगी।
लेकिन क्या? इसकी कोई अहमियत नहीं,
नए साल के मौक़े पर फूलों से अब तक लदा है एक दरख़्त,
बची हुई है दुनिया में सद्भावना
बच्चे अब भी हँसते हैं
प्रेमीयुगल एक-दूसरे का हाथ थामते हैं अँधेरे कोनों में
और हम सभी के ऊपर चमकता चाँद नया है।
मेरी जान, अब मत रोओ,
जैसे सब मरते हैं हम भी वैसे ही मरेंगे,
लेकिन जिससे हमें पीड़ा होनी चाहिए
वो मृत्यु नहीं है
वह दरअस्ल इंतज़ार है—
वह बीच का वक़्त जब हम कुछ कर नहीं सकते
वो भी तब
जब हमारी इच्छा तानाशाही की बेड़ियों में जकड़ी हुई हो,
यही बात टीस पैदा करती है
तब भी, किसी न किसी रूप में, मुझे यक़ीन है
दुनिया में फिर से करिश्मा होगा
टीस के बावजूद
प्यार की प्रचुरता
ख़ाली जगह को भरेगी,
वही मृत्यु को चुनौती देगी।
(तब तक के लिए)
शब-ब-ख़ैर, मेरी जान!
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 435)
- रचनाकार : कोफ़ी अवूनोर
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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