Font by Mehr Nastaliq Web

बिहारी मजदूर

bihari majdur

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

बिहारी मजदूर

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    रोजे-रोज जुटेलन स—

    स्टेशन पर

    बिहारी मजदूर,

    झुंड के झुंड;

    जवना के हाँकेला

    एगो चरवाहा,

    जइसे कि माल-गोरू होखन स!

    डिब्बा में कोंचाइल,

    बोरा अस लदा के

    छल्ली लागल,

    भा छत पर पटाइल;

    'शहीद', 'जनसेवा', 'साबरमती’

    धकधकात रेल

    हो जाला 'पवन'।

    अपनन से दूर,

    फाँकत सपनन के धूर

    पहुँच जाला—

    पंजाब, दिल्ली, गुजरात,

    मुंबई।

    जांगर ठेठावत,

    रात-दिन एक करत,

    जीयत-मरत

    अंगुरी पर गिनेलन

    दिन हफ्ता-महीना-साल।

    आवे लागेला इआद—

    आपन देश,

    जाने कइसे दो

    देशे में

    मिलल बा परदेस।

    पाई-पाई जोड़त,

    अपना भाग के कोड़त,

    किनेलन

    माई खातिर चादर,

    मेहरी खातिर लूगा,

    बहिनी खातिर फराक,

    बाबू खातिर छाता।

    बड़ा जतन से

    जोगा के राखेलन

    चोरपाकिट में

    रेहन धइल—

    खेत छोड़ावे खातिर—

    रोपया।

    डिब्बा से छत ले

    बहरी-भीतरी

    लदाइल- कोंचाइल

    बिहारी मजदूरन से पाटल

    एक्सप्रेस

    सीटी मारत

    धर लेवेले रफ्तार।

    जवना में तरह-तरह के

    बेमारी के जिवाणु

    अपना देह में भरले,

    चादर-लूगा-फराक-छाता

    करेज से सटले—

    बड़ा कठोर साँसत में

    जागत-ऊँघात-सपनात

    ठेलात-धकियावल जात—

    लतवँसल जात

    सोनहुला बिहान के ललसे

    लवटेलन बिहारी मजदूर।

    जब आवेला

    यू. पी.-बिहार के सीवान—

    सिहरा देवेला—

    पुरवइया बेयार,

    सोहर के बोलावे लागेला—

    आकाश!

    जब कवनो स्टेशन पर

    रूकेले एक्सप्रेस,

    दउरेलन से कुक्कुर,

    करिया-करिया कुक्कुर;

    संगे लेले

    खाकी रंग का—

    कुक्कुरन के जमात।

    जवन दाँते-नोहे

    नोचे लागेले-स

    बिहारी मजदूरन के देह

    मोटरी।

    हबके लागेलन करेज।

    दाँत से खिंच लेवेलन

    माई के चादर,

    मेहरी के फराक।

    नोहे नोचे लागेलन

    बाबू के छाता।

    करेज से काढ़ लेवेलन

    ओकरा खून के कमाई।

    नोंचइला चोंथइला के

    दुख में

    रहेला डूबत-उतरात,

    तले मिल जालन

    ठग मामा कि ठग मउसा

    हीत-नात के

    ढोंग रचनिहार

    जे परेम से खियावेलन बिसकुट,

    पियावेलन जहर मिलावल चाह।

    चोरपाकिट से कटा जाला—

    ओकरा जाँगर के कमाई,

    जोड़ल पाई-पाई।

    गाँव के स्टेशन पर

    रूकेला एक्सप्रेस

    जहँवा उतार दियाला,

    लस्त-पस्त हालत में

    बिहारी मजदूर,

    ना

    ओकर सँड़ाध मारत,

    बजबजात लाश।

    स्रोत :
    • पुस्तक : खरकत जमीन बजरत आसमान (पृष्ठ 64)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट (बोकारो)
    • संस्करण : 2015

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY