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भ' जाइ हमर कविता पूर्ण

bha jai hamar kavita poorn

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

भ' जाइ हमर कविता पूर्ण

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    जखन हम रचि रहल होइत छी

    कवितामे एकटा संसार

    कविता सेहो रचि रहल होइत अछि

    हमरा भीतर कोनो संसार

    ओना त’ हमर संसार रहैत अछि

    कविताक रचल संसारसँ

    एकदम फराक

    मुदा हम रहैत छी, ओहि दुनू संसारमे

    एक-दोसरसँ नितांत अपरिचित

    अनचिन्हार सन

    किनसाइत एक दोसरकेँ

    चिन्हबाक उपक्रम

    जोड़ि दैक कोनो टूटल सम्बन्धक कड़ी

    सोझरा दैक कोनो ओझरायल परिचय

    कि मोन पाड़ि दैक

    कोनो बिसरल बात

    किनसाइत भेटि जाइक किछु निरैंठि आखर

    जाहिसँ पूर्ण भ' जाइ

    हमर कविता

    फूजैक बाट

    जे जाइत होइक

    हमर रचल संसारसँ

    कविताक रचल संसार धरि।

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 11)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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