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बेटियाँ 1900

betiyan 1900

मेरिलियन नेल्सन

मेरिलियन नेल्सन

बेटियाँ 1900

मेरिलियन नेल्सन

और अधिकमेरिलियन नेल्सन

    बरामदे पर गिर रही ढलवाँ रोशनी में

    पाँच लड़कियाँ आपस में झगड़ रही हैं

    सबसे बड़ी बेटी,

    उन नई सच्चाइयों संग घर आई है,

    जिन्हें अपनी बहनों को सिखाने का इंतज़ार

    शायद ही वह कर सके

    ड्योढ़ी पर तिरछे पड़ते प्रकाश में

    वह अपनी बहनों को समझाती है :

    आसमान को टटोलती छोटी लड़कियाँ,

    अपनी कोहनियों को पसलियों की तरफ़ मोड़कर

    आह भरती हैं

    बरामदे के ढलवाँ प्रकाश में

    नीली टहनियों वाली सनौबर के छोटे पौधे से,

    जिसकी पत्तियाँ नई सच्चाइयों की तरह पीली-भूरी हैं,

    नीले रंग के बेल-बूटों वाले कपड़े,

    जिनकी पत्तियाँ नई सच्चाइयों की तरह पीली-भूरी हैं,

    पहने ये बेटियाँ

    वे शायद ही ख़ुद सीखने के लिए इंतज़ार कर सकते हैं,

    ताकि उनको ‘मैडम’ कहा जाए

    ऊँची एड़ी के सैंडल पहनकर

    झूलते हुए पुल के पार वाले शहर

    जाने वाली ये पाँच बेटियाँ

    इन ख़ूबसूरत बेटियों,

    जिन्हें पोंप और उनकी पत्नी ऐन ने जन्म दिया है,

    को कुछ पलों तक निहारने के लिए पोंप

    अपना अख़बार नीचे करते हैं,

    वे अपनी बेटियों को थोड़ी दुनियादारी सिखाना चाहते हैं

    जिन्हें सीखने का सब्र

    शायद ही उनके पास है

    सबसे बड़ी बेटी नाक से साँस खींचते हुए बोलती है—

    ‘‘किसी स्त्री को खरोंच नहीं आनी चाहिए’’

    तीसरी नाक से आवाज़ करती है,

    ‘‘नॉक, नॉक : घर पर कोई घर नहीं’’

    चौथी स्वीकार करती है—

    ‘‘ठीक है, शायद चर्च में नहीं…’’

    बरसाती पर झुकी हुई चमक में पाँच बेटियाँ

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : मेरिलियन नेल्सन

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