बजार-2 कबीरा ठाढ़ बजारक माँझ
bajar 2 kabira thaaDh bajarak maanjh
सुमित मिश्र गुंजन
Sumit Mishra 'Gunjan'
बजार-2 कबीरा ठाढ़ बजारक माँझ
bajar 2 kabira thaaDh bajarak maanjh
Sumit Mishra 'Gunjan'
सुमित मिश्र गुंजन
और अधिकसुमित मिश्र गुंजन
हम जतय धरि देखि पाबैत छी
मात्र बजार देखाइत अछि हमरा
एतहि जनमलहुँ
एकरे जीबै छी
लिखै-गाबै छी सेहो एकरे
नहि क' पाबै छी फरीछ
हमरा मे बजार अछि
आ कि बजार मे हम
देखियौ त'
बिका गेलैए अकास
बन्हकी लागल अछि धरती
तराजूक पलड़ा पर
संगे-संग राखल अछि
चान आ सुरुज
कियो दैत अछि बोली
रामे-राम एक, हे एक!
एतय सकियो बिकायल अछि
हमहूँ-अहाँ
जँ
नहि होइत अछि भरोस
कने ध्यान सँ देखियौ
अपने तराजूक पलड़ा पर बैसल छी
लग मे कियो जोर सँ बाजि रहल अछि
रामे-राम दू, हे दू!
- पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 51)
- रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
- संस्करण : 2024
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