बादल निरखने से ढाढ़स बँधता है, हमेशा
badal nirakhne se DhaDhas bandhta hai, hamesha
यान कप्लिंस्की
Jaan Kaplinski
बादल निरखने से ढाढ़स बँधता है, हमेशा
badal nirakhne se DhaDhas bandhta hai, hamesha
Jaan Kaplinski
यान कप्लिंस्की
और अधिकयान कप्लिंस्की
तुमने मेरे लिए एक बादल भेजा
जब मैं बीमार था
तुमने कहा मैं देखते ही पहचान लूँगा
उस पर मेरा नाम होगा
मैं खिड़की से आसमान ताकता रहा
बादलों का अध्ययन करते हुए
उस दुपहर
गहरे नीले और
सफ़ेद के ढेर से
वह नज़र आया
जैसे एक स्लेटी घोड़ा
मैदान में आराम फ़रमा रहा हो
तुम इसका ही ज़िक्र कर रहे थे
मुझे पता है
मैंने देखा—
उसके लचीले शरीर को
घोड़े से फिर बादल के स्वरूप में ढलते हुए
जैसा आमतौर पर ऐसे आकार रूप बदलते हैं
अब हर रोज़
यह ठीक मेरे बग़ल में तैरता है—
वह चुप घोड़ा। तुम्हारी सौग़ात। मेरा बादल।
- पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
- संपादक : अविनाश मिश्र
- रचनाकार : यान कप्लिंस्की
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