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बड़ा नीक लागै

baDa neek lagai

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

बड़ा नीक लागै

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    बड़ा नीक लागै माई तोहरा अँगनवा,

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा।

    कारी-कारी बदरी तौ घेरे बाटीं सगरौ,

    भटकै अन्धेरवा मा तकदीर हमरौ।

    सूना-सूना लागै बिना तोहरे भवनवा,

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा॥

    तोहरे दुअरवा कै हमतौ भिखरिया,

    तोहरा भइले मोर जियरा बवरिया।

    अब तनी आवा माई लागे नाहीं मनवा,

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा॥

    सपनेव देखब जौ हम तोहरी सुरतिया,

    जियरा सपनवा सजावै सारी रतिया।

    बैरी होत जाला मोर सगरौ जमनवा।

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा॥

    सूर सती माई तनी कइद्या नजरिया,

    तोहरे दया से मोर भरिहैं बखरिया॥

    बीतै उमरिया मोर तोहरे गोहनवा।

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा॥

    रहिया तकत मोर थकिगै पुतरिया,

    नाही जाना हम कब देखबै अँजोरिया,

    भरि देतू झोलिया पसारे परवनवा।

    सपनवा हो तौ जाला तोहार दरसनवा॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 4)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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