बड़ा-बड़ा फेरा बा
भारी झमेला बा
तिलक त लेबे के मन नइखे समधी जी
दहेज के पेंच लगावे के सरधा
एकदम नइखे समधी जी
बाकी हई—
नाच ह बाजा ह, खजुली ह खाजा ह
साज ह समैना ह, बीजे ह बैना ह
गाँव ह जवार ह, गोतिया देयाद ह
हीत ह हितारथ ह, सभके सवारथ ह
हरिस ह कलसा ह, गउरी गनेसा ह
पूजा ह पतरा ह, देवतन के असरा ह
गहना ह गुरिया ह, पवनी पनहरिया ह
सूट ह साड़ी ह, डोली ह गाड़ी ह
कोंकड़वर ह बुकवा ह, बाभन ह नउआ ह
बुनिया ह पूड़ी ह, खइनी ह बींड़ी ह
सेनुर सिन्होरा ह, मउर ह मोन्हा ह
आ अतने ले थोरे
जोराई ना जोरले
बियाह के बादो ले
जरलका के जेठ, भरलका के भादो ले—
बड़ा-बड़ा बीपत ह, नेवता बउरहँत ह
फगुआ ह तीज ह, कतना दो चीझ ह
मेमिन ह चमइन ह, छठी ह बरही ह
बर ह बेरामी ह, तूल ह तलामी ह
अब सुभ के मोका प ए सवाँग
लेबे के त ना लेब
पाँच गज मरकीन भा रंथी के नाँव
अब जेकर बेटिए चलि जाई
सेकर दुख कहले कहाई!
बाकी...
बाकी ना होई गउदान-सेजियादान
दसवाँ-सराध
त रवे कहीं
अपने छाती प ध के हाथ
कि होई बरदास?
से अतने सकार लीं
सभके निबाह लीं
आ तबो जे माँगी हम कुछुओ
त दीं कागज
मोंछ के ठेप्पा दे के लिख दीं
कि कुत्ता करार दीं
आ हा लीं
चाह त ठंढाता
पीहीं...पीहीं ना,
पीहीं!
- पुस्तक : बेटी मरे त मरे कुँआर [भोजपुरी कविता-संग्रह] (पृष्ठ 1)
- रचनाकार : प्रकाश उदय
- प्रकाशन : कौशल्या प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 1988
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