अयोध्या 1991

अनिल कुमार सिंह

अयोध्या 1991

अनिल कुमार सिंह

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    रोचक तथ्य

    इस कविता के लिए कवि को भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार प्राप्त हुआ।

    जंगल में नहीं है अयोध्या

    अयोध्या एक शहर का नाम है

    जैसे भोपाल

    ट्रेन और बस की खिड़कियों का रिश्ता

    नहीं है मेरा इस शहर से

    छोटा था तब

    दादी के साथ आता था

    अब अकेले आता हूँ इस शहर में

    जिस तरह तमाम लोग मोक्ष के लिए आते हैं यहाँ

    उसी तरह रोटी की खोज में भी आते हैं तमाम लोग

    शहर एक ज़िंदा शब्द है

    इसकी मिसाल है अयोध्या

    भेड़ियों की शिकारगाह नहीं है यह शहर

    अयोध्या एक ऐसा शहर भी है

    जिस पर हिंदी के कवि कविताएँ नहीं लिखते

    कविता के कालजयी होने के भयवश

    या पता नहीं किस कारण

    की होगी किसी तुलसीदास ने ऐसी हिमाक़त पहले कभी

    सिर्फ़ हवनकुंड नहीं है अयोध्या

    ज़िंदगी की हवि नहीं दी जा सकती उसमें

    मनुष्य रहते हैं इस शहर में

    जिनमें रहता है भगवान

    और चूँकि भगवान मनुष्य में रहता है

    इसलिए वह अल्लाह भी हो सकता है

    ज़िंदगी की भागदौड़ है इस शहर में

    तमाम अन्य शहरों की तरह ही

    श्मशान नहीं हो जाते इलाक़े

    सियारों के फेंकरने से

    चालू राजनीति का गर्भपात नहीं है अयोध्या

    अयोध्या एक शहर का नाम है

    जिसमें लोग खाते-पीते और ज़िंदा रहते हैं

    एक शहर का नाम है अयोध्या

    जिसमें लोग ज़िंदगी की लड़ाई लड़ते हैं और अंत में मर जाते हैं

    यानी भौतिक वास्तविकताओं से कुछ भी

    अलग हटकर नहीं है इस शहर में

    इतना ही यथार्थ है यह शहर जितना यह कि

    आदमी का कलेजा काटकर इसकी जगह

    शिवलिंग रख देने से वह मर जाएगा

    किताबों में होगी वह अयोध्या

    जिसमें राम रहते थे और जिन्होंने राजपाट

    त्याग दिया था चौदह बरस के लिए

    हमारी अयोध्या में हम और हमारे जैसे ही

    अन्य लोग रहते हैं

    हमारी अयोध्या में रोजी-रोटी देती है

    ज़िंदा रखती है

    हम उसे पत्नी की तरह प्यार करते हैं

    बच्चों की तरह दुलारती है वह हमें

    क्या राम भी राक्षसों के हवाले कर सकते थे इसे कभी

    अगर वे सचमुच रहते होते इस शहर में?

    क्या कोई भी नरभक्षियों के हवाले कर सकता है इसे

    अगर वह सचमुच रहता है किसी शहर में?

    अयोध्या एक शहर का नाम है

    जंगल में नहीं है अयोध्या।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहला उपदेश (पृष्ठ 41)
    • रचनाकार : अनिल कुमार सिंह
    • प्रकाशन : राधाकृष्ण प्रकाशन
    • संस्करण : 2001

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