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आवाज़ें हवा में पनाह लेती हैं

avazen hava mein panah leti hain

पूनम शुक्ला

पूनम शुक्ला

आवाज़ें हवा में पनाह लेती हैं

पूनम शुक्ला

और अधिकपूनम शुक्ला

    आवाज़ें भी कई-कई तरह की

    आस-पास से गुजरती हैं कई-कई दिन

    मसलन आवाज़ें हवा की ही

    पत्तों के बीच से कुछ सरसराती हुई

    अरगनी पर सूखते कपड़ों के बीच

    कुछ फड़फड़ाती हुई

    हनहनाती हुई पंखे के संग

    वस्तु व परिस्थिति को देखकर

    हवा बदल लेती है अपनी आवाज़ का रूप

    मसलन घाटियों में टहलती हवा

    देती जाती सीटी की आवाज़

    तेज तूफ़ान में ख़ूब साँए-साँए की आवाज़

    समुद्री तटों पर लहरों संग हवा की हरहराती आवाज़

    जब तुम कुछ भी बोलते हो

    तुम्हारी आवाज़ बन जाती है हवा की

    फिर तैरती हुई झट से पहुँच जाती है मुझ तक

    और दरवाज़े पर दिए गए दस्तक की आवाज़

    हवा में ही घुलती हुई

    तब्दील हो जाती है दिल की दस्तक में

    चिड़ियों की चहचहाहट हो

    या फिर बादलों का गरजन

    सभी आवाज़ें हवा में पनाह लेती हैं

    दरअसल होती नहीं हवा की अपनी आवाज़

    छुपी होती है हवा में ही सभी आवाज़ों की आवाज़।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूनम शुक्ला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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