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और इन सब लोगों में

aur in sab logon mein

अनुवाद : नेहल शाह

रेनर मरिया रिल्के

रेनर मरिया रिल्के

और इन सब लोगों में

रेनर मरिया रिल्के

और अधिकरेनर मरिया रिल्के

    और इन सब लोगों में

    तड़पते हैं

    तुम्हारे बेचारे ग़रीब,

    जो कुछ भी वे देखते हैं,

    वह उन्हें ढाँप देता है

    अपने भार से,

    जैसे वे काँप रहे हों,

    तप रहे हों बुख़ार से।

    वे बेदख़ल होते हुए अपने ही जीवन से,

    भटकते हैं रात में

    अतृप्त आत्माओं से,

    गंद और गर्त से दबे हुए,

    घबरा जाते हैं

    बेतरतीब दौड़ते यातायात से,

    उसके शोर और प्रकाश से।

    यहाँ, यदि कोई मुख मौजूद है

    इनके संरक्षण के लिए,

    तो अब समय है कि वह खुले और कुछ कहे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : रेनर मरिया रिल्के

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