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बदलाव, मेरी जूती!

badlav, meri juti!

ऋचा कश्यप

ऋचा कश्यप

बदलाव, मेरी जूती!

ऋचा कश्यप

और अधिकऋचा कश्यप

    चक्का जाम कर लो

    बैठ जाओ धरने पर

    मोमबत्तियाँ जला दो

    विरोध करो

    प्रतिवाद करो

    मैडलों की वापसी

    कुछ कर लो

    कानून अंधा, मूक बधिर

    सत्ता की तृष्णा आँखों में

    उनकी पुश्ते भी ठाठ से होंगी।

    और तुम्हारे पुरखे,

    सुनो यह चीत्कार

    पेट आँतों में चिपट आया हैं

    जैसे चमगादड़, उल्टे लटके देखे थे

    पहली बार पिंजोर में

    तब से अब, न्याय बिछोह में जिया

    खनकते सिक्के थे जेबों में मेरे

    जब भागती सड़क ने कुचल डाली टाँगे मेरी

    सी सी टी वी में ग़रीबों का मरना दर्ज़ नहीं होता

    जैसे प्रेतों का रूहदार आकार

    ना कोई बयानबाजी,

    सब बहरा गए थे

    सब अंधे, सब बधिर

    श..श

    सब मौन

    किसी ने कुछ देखा सुना

    मायूसी में सुलग रहे थे कोखों में पलते बच्चे

    काश, भीतर नौ माह और रह पाते

    मोमबत्तियाँ, धरने, प्रतिवाद, विरोध

    धनवानों के मन बहलाने की गतिविधियाँ या भटकाव मुद्दे से

    बेचारा ग़रीब तो दो बख़्त की रोटी

    में उलझा है

    साथ ही उलझ गया न्याय

    दाँव पेचों के पासों में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ऋचा कश्यप
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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