Font by Mehr Nastaliq Web

अपनी बहन की तारीफ़ में

apni bahan ki tarif mein

अनुवाद : सुरेश सलिल

वीस्वावा षिम्बोर्स्का

वीस्वावा षिम्बोर्स्का

अपनी बहन की तारीफ़ में

वीस्वावा षिम्बोर्स्का

और अधिकवीस्वावा षिम्बोर्स्का

    मेरी बहन कविता नहीं लिखती

    और मुझे नहीं लगता कि कभी यक्-ब-यक्

    वह कविता लिखने लगेगी।

    वह अपनी माँ जैसी है, जो कविता नहीं लिखती थी

    और अपने पिता जैसी, जिन्हें कविता से कोई लेना-देना नहीं था।

    अपनी बहन की छत के नीचे

    मैं अपने-आप को सुरक्षित महसूस करती हूँ :

    मेरे जीजा कविता लिखने की बजाय मर जाना बेहतर मानेंगे

    और यह किसी हाथ आई कविता जैसा महसूस होता है

    कि मेरे रिश्तेदारों में से कोई भी कवि-कर्म से जुड़ा हुआ नहीं।

    मेरी बहन की फ़ाइलों में पुरानी कविताएँ नहीं हैं

    उसके हैंडबैग में नई कविताएँ हैं

    और जब भी वह मुझे खाने पर बुलाती है

    मुझे पता होता है कि कविताएँ सुनाने का उसका कोई इरादा नहीं

    उसका सूप बढ़िया तरीक़े से बना होता है

    उसकी चिट्ठियों पर कॉफ़ी के धब्बे नहीं होते।

    ऐसे बहुत-से परिवार हैं जिनमें कविता से

    किसी का कोई लेना-देना नहीं,

    और है भी तो ब-मुश्किल किसी एक का।

    लेकिन कभी-कभार ऐसी भी मिसालें देखने में आती हैं

    कि एक-के-बाद-एक

    पीढ़ियों से कविता उफ़नती चली रही है—

    आपसी भावनाओं में भीषण भँवर बनाती हुई।

    मेरी बहन बोलचाल का बहुत अच्छा गद्य गोदती है

    उसका लिखना-पढ़ना महज छुट्टियों के दौरान लिखे जाने वाले

    पोस्टकार्डों तक सीमित है,

    और हर साल एक ही नपा-तुला मसौदा—

    कि मिलने पर

    इस बाबत वह मुझे

    सब कुछ

    सारा कुछ

    बताएगी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 321)
    • रचनाकार : वीस्वावा षिम्बोर्स्का
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY