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अपनाकेँ चिन्हबाक क्रममे

apnaken chinhbak kramme

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

अपनाकेँ चिन्हबाक क्रममे

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    बरु तीते रहैक

    मुदा अपन बाड़ीक त' रहैक

    सुआद पैघ कि अपनैती

    मुदा नहि

    ओकरा भेलै जे

    नहि बुझना जा रहलैक

    ओकर महत्व, ओकर मूल्य

    ओकर नजरि गेलैक

    अपने सन दोसर सागपर

    नीक जकाँ खोंटल

    काँटि-छाँटिक', सजाक' राखल

    बड़का-बड़का बजार किंबा मॉलमे

    कतेक सोहनगर कतेक देखनौक कतेक मूल्यवान

    कहू त’

    सभ देखि

    कोना पसीन पड़ितैक ओकरा

    अपन दुर्गति

    जकरा मोन फुरलैक

    आनि लेलक खोटिक' पथियाक-पथिया

    बना लेलक दलिसग्गा

    सुड़कने जा रहल तकरा बट्टाक-बट्टा

    नहुँए-नहुँए परिचित भ' चुकल अछि

    अपनासँ

    बूझि चुकल अछि अपन महत्वकेँ

    अपनाकेँ चिन्हबाक क्रममे

    तय कयलक

    बाड़ीसँ बाजार धरिक यात्रा

    किनसाइत यैह रहैक

    ओकर विकास यात्रा

    सशक्त होयबाक उपक्रम...

    आइ बड्ड पूछ छैक ओकर बजारमे

    छैक आब एकटा पैघ ब्रांड

    जे तय करैत छैक बजारक परिदृश्य

    सरिपहुँ बहुमूल्य भ' गेल अछि 'ओ'

    मुदा!

    बरु तीते रहैक

    अपन त' रहैक

    अपना बाड़ीक त' रहैक

    ओकर कोनो मूल्य नहि रहैक

    बहुमूल्य नहि

    अमूल्य रहैक।

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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