बड़ी अज़ीब बात है कि
हमारे पास करने को बहुत-सी बातें हो सकती थीं
लेकिन हम कभी आपसी लड़ाइयों से आगे न बढ़ सके
हमें एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े होना है
हमें एक-दूसरे के धर्मों के विरुद्ध
नित नए षडयंत्र रचने हैं
एक-दूजे के धर्म के विरुद्ध
जाति के, समाज के, व्यक्ति के विरुद्ध।
और इसी तरह हम खड़े हुए
मानवीयता के विरुद्ध।
जबकि इस दुनिया में नफ़रत से परे
कितना कुछ था रचने के लिए
लेकिन
हमने धर्म के झँडों पर नफ़रत को रचना शुरू किया।
हमें एक-दूसरे की भावनाओं पर
इतना ज़हर उगलना था
कि हम साँपों को भी पीछे छोड़ सकें किसी दिन
कि खून बहा देना बड़ी बात न लगे।
बड़ी अज़ीब बात है
कि ख़ूनियों के पक्ष में भी एक पक्ष है
बड़ी अज़ीब बात है कि
हमें इंसान से जानवर बनते जाने में
कुछ अज़ीब नहीं लग रहा
बड़ी अज़ीब बात है कि
हमें ख़ुद को ही ख़त्म करते जाने में
कुछ अज़ीब नहीं लग रहा...
- रचनाकार : अनामिका अनुगूँज
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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