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अँखुआ रहल अछि किछु स्वप्न

ankhua rahal achhi kichhu svapn

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

अँखुआ रहल अछि किछु स्वप्न

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    बहुत रास स्वप्न रही रखने

    पोसिक' अपना आँखिमे

    पूर्ण करबाक लेल तकरा

    कयलहुँ अपन पैरुख भरि प्रयास

    किछु भेल पूर, किछु नहि

    मुदा नहि देल दोष कहियो

    सर-समाजकेँ, ईश्वर आकि भाग्यकेँ

    एम्हर किछु दिनसँ

    अँखुआय रहल अछि फेरसँ

    किछु स्वप्न मोन

    स्वप्न अछि जे सृजित करी

    एकटा विश्वासक विश्व, एहि विश्वमे

    आयोजित करी एकटा सभा

    जाहिमे प्रार्थना होइक प्रेमक पक्षमे

    जड़ताक प्रतिवादमे

    अन्हारक मोहार पर

    किछु काल बिलमिक' विचार करी

    अतीतक चौबटिया पर

    नजरिमे राखि भविष्यकेँ

    उठाबी एकटा डेग अकानिक'

    प्रगतिशीलताक रुक्ख बाट पर

    कविताकेँ सम्बल दैत लिखी एक गोट कविता

    पूर्ण क' ली ओहि सभटा स्वप्नकेँ

    जे रहि गेल छल अपूर्ण

    समयकेँ अकानैत कने बेमनसँ

    स्रोत :
    • पुस्तक : नो मेन्स लैण्ड पर ठाढ़ कवि (पृष्ठ 99)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2024

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