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आन्हर छथि भगवान

anhar chhathi bhagvan

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

आन्हर छथि भगवान

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

और अधिकचन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

    आन्हर छथि भगवान, कहओ के?

    आजुक युगमे भौतिकवादक, फूसि-फटक अभिमान, कहओ के?

     

    पाथरमे ओ बास करै छथि,

    आ हमरे उपहास करै छथि,

    हमरेसँ पुजबै छथि आ हमरेपर 'शेखी-शान', कहओ के?

     

    सुन्दरता लय पुरुष फटै छथि,

    नारी वर्गक नाक कटै छथि,

    तेँ तँ महिला सब उठि चलली, काटय पुरुषक कान, कहओ के?

     

    ओ लड़ती आ भिड़ती जा कऽ,

    सभा-मंचपर अड़ती जा कऽ,

    पुरुष-समाजक बीच झाड़ती, बड़काटा व्याख्यान, कहओ के?

     

    पुरुषक हेतु अनारी नारी,

    पुरुषे नारी हेतु अनारी,

    फूसि घोँघाउजिमे दुनू दल, होइ छथि व्यर्थ हरान, कहओ के?

     

    प्रकृति-पुरुष दूनू समान अछि,

    ने ई न्यून, न ओ महान अछि,

    युग-चक्रक चक्करपर नाचल, निश्चित अनुसन्धान कहओ के?

     

    पेटक अछि लागल लपेट जा,

    मुँहपर अछि लागल चपेट ता,

    ककर माय ओ बाप ककर, वा होइत छै सन्तान, कहओ के?

     

    सभक उखाही सब करैत अछि,

    अपनेटा लय जग मरैत अछि,

    आनक लेखेँ आन बनल अछि, आलू सड़ल-पुरान, कहओ के?

     

    अपना लग संसार ढीठ अछि,

    आँखिक लेखेँ पाछु पीठ अछि,

    सभक जनै छै सब तैओ, अनके लय सब बैमान, कहओ के?

     

    एकर विवेचन के करैत अछि,

    जे 'करैत’ 1 अछि से करैत अछि,

    हमरो सन बुड़िवान बुझै अछि, अपनाकेँ विद्वान, कहओ के?

     

    सब अलच्छ अवतार लेलक अछि,

    रुच्छ-छुच्छ संसार देलक अछि,

    अपन बेगर्त्ते युग अछि आन्हर, परतच्छक परमान, कहओ के?                      

    स्रोत :
    • पुस्तक : चन्द्रनाथमिश्र ‘अमर’ रचना संचयन (पृष्ठ 309)
    • संपादक : योगानन्द झा, शम्भुनाथ झा, विजयदेव झा
    • रचनाकार : चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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