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ऐसी थी कविता

aisi thi kavita

अनुवाद : सुरेश सलिल

अल महमूद

अल महमूद

ऐसी थी कविता

अल महमूद

और अधिकअल महमूद

     

    कविता तरुणाई की मेरी स्मृति थी। 

    वह मेरी अम्मी का उदास चेहरा थी, 

    नीम के गाछ पर बैठी एक बया,

     

    रात के वक़्त। 

    सूखी-झरी पत्तियों से जलाए गए 

    अलाव के आसपास बैठे मेरे छोटे भाई-बहन,

     

    बाबा*1 की घर वापसी, 

    उनकी साइकिल की घंटी की आवाज़—

    राबेया, राबेया—

    और अम्मी के नाम की पुकार के साथ 

    दक्खिन तरफ़ का खुलता दरवाज़ा।

     

    कविता, कोहरे से घिरी पगडंडी के छोर पर, 

    घुटने-भर गहरी नदी पार करना थी, 

    सुबह की अज़ान, या फ़सल के बाद 

    जलते पुआल की लहकती लपटें, 

    घर के बने पूओं की करारी पपड़ी पर राई की प्यारी-प्यारी बुँदकियाँ,

    मछली की बास, सूखने के लिए अँगनाई में फैलाया गया मछलीजाल 

    और बाँस की पत्तियों के झुरमुट में दादा ठाकुर की क़ब्र।

     

    कविता 1940 के दशक में विकसित हो रहा एक अशांत किशोर थी। 

    स्कूल से भागकर आए एक छात्र की, आम सभाओं में गुप्त उपस्थिति, 

    आज़ादी, जुलूस, झंडे, बड़े भाई से सुनी 

    एक भयानक सांप्रदायिक दंगे की दर्दनाक दास्तान, 

    सर्वनाश से गुज़र कर वापस होता एक मुफ़लिस।

     

    कविता चरागाह में विचरते पाखियों का एक झुंड थी 

    सावधानीपूर्वक एकत्र किए गए अंडे, 

    सुवासित घास, उदास दिखती एक कृषक वधू का बंडैल बछड़ा, 

    नीले लिफ़ाफ़ों में बंद गुप्त पत्रावलियों पर उभरे सुडौल अक्षर। 

    कविता अपने लंबे खुले केश फरफराती 

    मेरे ग्राम-विद्यालय की आयशा अख़्तर थी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 442)
    • रचनाकार : अल महमूद
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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