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ऐ अकाबोन मे कत्ते कानब

ai akabon mae katte kanab

राज

राज

ऐ अकाबोन मे कत्ते कानब

राज

और अधिकराज

    की हैत कहिक' बेर-बेर

    फेर-फेर वैह बात कहिक' की हैत

    अहाँ त' कहबे करब

    गाउले गीत अनेर की गबै छी

    बेर-बेर एके बात जुबान पर की लबै छी

    हमहूँ जनै छी जे कहिक' कोन फल

    कत्तौ नै छै पानि

    सभटा महज मृगजल

    मुदा एगो बात कहू

    जावत बदलै नै थीत

    आर चारे की छै

    कहब छाड़ि आन सहारे की छै

    अहीं कहू ने

    आर कोन बात कहब

    जेहने जतै रहब

    तेहने तकरे ने कहब

    एहनातिये त’ अबैत रहलैए

    दाही-जरती मरकीक सोगाइत

    साले-साल

    कहिया भेलै चैन

    सभ दिन त' खस्तेहाल

    हाल-बेहाल

    ने कहियो विराम

    ने क'ल

    दू टूक

    दू कौर

    सभटा मोहाल

    बरनी, अहाँ जाउ

    अहाँ की हमर बात मानब

    उनटे हमरे पर दस-दस हाथ फानब

    रारि करब

    अरारि ठानब

    दिन-दिन हमर हक

    आर दफानब

    हम कहि रहल छी हजूर

    हम माने एगो अदना कवि

    माने एगो अदनार छवि

    अदना लोकक मादे

    अदना लोकक सभ कहनाम

    अदने होइ छै ने हजूर

    अदना लोकक सभ इजहार

    अदने ने होइ छै

    रह' दियौ साहेब

    एहि जङ नियायो कंटोल स' भेटै छै त' की भेलै

    पाँच-दस पाइ चढ़लै छै त' कोन

    फड़क पड़ै छै

    कंटोलिया गहूम सन भूस

    आकि अंकड़ी छै त' की भेलै

    गरीबक आँत के आँकर-पाथर

    किछ ने गड़ै छै

    हे यौ! मुरदा पर कांचो जारनि ने जड़ै छै

    की करू बेबस भ' सुनाब' पड़ैए

    ओही गामक कथा

    जत' अभावक दुस्शासन

    घिचैत होइ

    अनगिन द्रुपदसुताक साड़ी

    हतासलि द्रौपदी

    लाजें कठुवाएलि

    बकुटने नाम भरिक बस्तर

    आङ झाँपक करैत विफल प्रयास

    बेर-बेर चिहुँकैत

    बाकुट के आर बेसी कसैत

    भरोसलि अकानि रहलि

    कोनो कृष्णक पद चाप

    मुदा चौदिश सुना पड़ैछ

    खाली दुस्शासनी अट्टहास

    माने मानवताक उपहास

    बेर-बेर नियारै छी

    जे धुरिया तलफैत साओन

    उमकैत-भसियैत भादव बला गाममे

    मोसिमक जूआ खेलाइत लोकक मादे

    अनेर कहि की हैत

    की हैत कहि अपन सुखाएल झील के

    बेबस छोड़ि

    हतासल-हकासलि

    पनिजाब-भदोही दिस उड़ल जाइत

    काहर-कुच्चर करैत

    जलाकांक्षी कर्रापाखीक मादे

    आकि उब-डुब करैत

    दहाइत-भसियाइत

    कोनो दीयरि पर अर्रा लागि

    मड़ौत बरेरी ठाढ़ करैत

    लोकक मादे

    कहि की हैत

    की हैत कहि जौड़खट्टा पर पड़ल

    माथक ऊपर चानक संसार

    तरेगनक मकैक कंसार के निहारैत

    लोकक मादे

    आकि झूकल डाँड़

    टिरुवाएल घेंट स'

    खेराती स्वातीक बूनक प्रतीक्षामे

    आतुर बेबस चातकी दीठिक मादे

    सरिपों कहि की हैत

    मुदा हजूर!

    कहू त' कहलौ ने जाइए

    बिन कहलो स' रहलौ ने जाइए

    फेर त' ओहिनातिये भेलै

    एगो टोल स' अगराही पजरलै

    छन मे सगरो गाम

    पसाही स' पसरि गेलै

    छनेमे छनाक भ' गेलै

    धू-धू जर' लगलै

    सुखाएल घास सन सगरो गाम

    छगाएल कतेको गामक

    मूंहक घास मूंहे रहलै

    चूब' लगलै चिचोरल थन स' सोनितक टघार

    कपैत कतेको कान्ह पर सवार भ' गेलै

    जुम्मुथ निस्पंद कोनो जुवान लहास

    सदानीरा थीरा

    वत्सला नदी पर्यंत

    भ' गेलै उद्धत

    सभ फेर कोनो कल्पित युद्ध

    गढ़' चाहैए हजूर

    एम्हर हमरा सभ

    अधिसंख्य अवामके

    कहियो सरङिया सुघर सपना देखबैत रहल

    बेर-बेर कोनो महापुरुषक कनहा पर

    बन्नुख राखि

    हमरा सभक तन्नुक भावनाके

    डंसैत रहल

    एगो अघोषित युद्ध लड़ैत रहल

    लड़बैत रहत

    मूल समसियाके टारैत रहल

    टरैत रहल

    जत' चिर्री-चोंत भ' रहल छै

    खांटियो अनुराग

    ओत' सभ मायावी अनुरागमे

    हमरा सभ के समेट' चाहैए

    खड़ाम पहिरि

    महासागर के थाह' चाहैए

    अलबत्ता गरमीक बेसरमी बेलामे

    शिलाखंड के तोड़ैत हाथक मादे

    जनतब-ऐ हमरा

    आंतक संग जाँतक शिला के घिचैत

    जनतब-ऐ हमरा

    जकर शिला पर नोनो नदारत छै

    तकर बातक जनतब-ऐ हमरा

    फेर अहीं कहू हजूर

    आर कोन मनगढ़ंत शिलाक बात करू

    ब्योंतल आस्थाक नाम पर

    अपनो आस्था पर घात करू

    जाउ हजूर

    आब कोनो बात ठोर पर नै आनब

    अकाबोनमे सरिपों किए

    कत्ते कानब?

    अकाबोनमे सरिपों किए कत्ते कानब?

    अकाबोनमे सरिपों किए कत्ते कानब?

    स्रोत :
    • पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : राज
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2011

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