Font by Mehr Nastaliq Web

आधुनिक प्रेम-कविता की एक रूपरेखा

adhunik prem kavita ki ek ruparekha

अनुवाद : शायक आलोक

तादेऊष रूज़ेविच

तादेऊष रूज़ेविच

आधुनिक प्रेम-कविता की एक रूपरेखा

तादेऊष रूज़ेविच

और अधिकतादेऊष रूज़ेविच

    और फिर भी—

    श्वेतता का सबसे सटीक वर्णन धूसरता से ही संभव है

    पक्षी का पत्थर से

    सूरजमुखी

    दिसंबर में

    पुराने प्रेम-काव्य

    देह के वर्णन हुआ करते थे

    वे इसे और उसे वर्णित करते थे

    जैसे कि पलकें

    और फिर भी लालिमा

    का वर्णन किया जाना चाहिए

    धूसरता से

    सूर्य का वर्षा से

    नवंबर में खसखस के फूल

    होंठ रात में

    रोटी का

    सबसे मूर्त वर्णन

    भूख का वर्णन है

    उसके भीतर है

    एक नम छिद्रदार केंद्र

    एक गरम आंतरिकता

    रात में सूरजमुखी

    मातृदेवी की देह : स्तन, पेट, जाँघें

    पानी का सबसे पारदर्शी

    स्रोत-सदृश वर्णन है प्यास का

    राख का

    मरुस्थल का वर्णन

    यह एक मृगतृष्णा रचता है

    बादल और पेड़ उतर आते हैं

    पानी के दर्पण में

    देह की

    कमी, भूख, अनुपस्थिति—

    यह है प्रेम का वर्णन एक आधुनिक प्रेम-कविता में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : तादेऊष रूज़ेविच
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY