यहाँ दीपक अँधेरों में जो कोई भी जलाता है
yahan dipak andheron mein jo koi bhi jalata hai
मनजीत भोला
Manjeet Bhola
यहाँ दीपक अँधेरों में जो कोई भी जलाता है
yahan dipak andheron mein jo koi bhi jalata hai
Manjeet Bhola
मनजीत भोला
और अधिकमनजीत भोला
यहाँ दीपक अँधेरों में जो कोई भी जलाता है
न जाने क्यों हवाओं को नज़र दुश्मन वो आता है
तिरी चारागरी पे हम हुए क़ुर्बान चारागर
हमें जब चोट लगती है तभी तू मुस्कुराता है
मेरे महबूब यारों से कभी तुमको मिलाऊँगा
कोई रिक्शा चलाता है कोई फसलें उगाता है
कोई दरिया से यूँ कहदे न उलझे वो किनारों से
किनारे टूटते हैं जब यहाँ सैलाब आता है
मुसाफ़िर शाहराहों के मुबारक हो सड़क तुमको
हमें प्यारा वो रस्ता है जो खेतों से मिलाता है
कलंदर मार देता है जिसे ठोकर जमाने में
सिकंदर उस ख़ज़ाने के सिवा क्या लूट पाता है
बनारस के नसीबों में लिखी फ़िरदौस की महफ़िल
मगर जश्न ए कज़ामुर्शिद मेरा मगहर मनाता है
- रचनाकार : मनजीत भोला
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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