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उड़त बा खून के छींटा, हवा में सनसनी बाटे

uDat ba khoon ke chhinta, hava mein sansani bate

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

उड़त बा खून के छींटा, हवा में सनसनी बाटे

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    उड़त बा खून के छींटा, हवा में सनसनी बाटे

    इहाँ मरघट मतिन चुप्पी बा, छवले मुरदनी बाटे

    रहे लागल बा अब चउपाल साँझी के बहुत सूना

    लगावत लोग होते साँझ घर के सिटकिनी बाटे

    भइल हर घर अखाड़ा, लोग सगरो कमर कसले बा

    जहाँ जेकर लहत बा देत मजिगर पटकनी बाटे

    पराया तऽ पराया, होत बाटे घात अपनन से

    इहाँ हर आदमी के मन में पइसल छनमनी बाटे

    कली फूल का हर ओर बाटे फूल से खतरा

    बगइचा में फुलवारी में ईहे सुनगुनी बाटे

    स्रोत :
    • पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 76)
    • संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
    • संस्करण : 2003

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