कहाँ नेह के बा घरामी बताईं
kahan neh ke ba gharami batain
कहाँ नेह के बा घरामी बताईं
केहू पूछे तब त बेरामी बताईं
बहुत भार जिनिगी के अब बढ़ गइल बा
जिए खाती हमरा सलामी बताईं
सधे काम कुछ खुद के जेकरा से सटि के
नया कवनो अइसन असामी बताईं
चढ़ल एह घोटाला का गरमी के तर में
कहीं कुछ त होई बे-नामी बताईं
लिखीला गजल-गीत अइसे त मन से
अगर होखे कवनो त खामी बताईं
- पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 75)
- संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
- प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
- संस्करण : 2003
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.