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हम छोड़ब ने ढाहब अहाँ केर भीत

hum chhoDab ne Dhahab ahan ker bheet

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

हम छोड़ब ने ढाहब अहाँ केर भीत

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    हम छोड़ब ने ढाहब अहाँ केर भीत

    छी बनल मीत शोषण अहाँ केर रीत।

    कालनेमिक कलासँ बनल छी अहाँ

    दी जलमे जहर अछि अहाँ केर रीत।

    दाम श्रम केर सभटा झपटि लैत छी

    घावपर नून सन अछि अहाँ केर प्रीत।

    हम मली हाथ, सोना मलै छी अहाँ

    भूख कानय हमर, घर अहाँ केर गीत।

    ठाढ़ जिनगी मरने केर डगरपर एतय

    निडर उर, ने कनियोँ अहाँ केर भीत।

    करब निर्माण समताक जग जाहिमे

    हम ने हारब, होयत ने अहाँ केर जीत।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

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