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क्यो एकरा दियौक नहि टोक

kyo ekra diyauk nahi tok

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

क्यो एकरा दियौक नहि टोक

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    क्यो एकरा दियौक नहि टोक

    अछि बहिरा अछि बौक

    नाचै अछि अपने तालेँ

    चढ़लापर कखनो कऽ झोंक

    अपनहि टा हित बूझै अछि

    अपनहि दुनियाँ अपनहि लोक

    बेचि रहल ईमान-धरम

    कखनो खुदरा कखनो थोक

    बसय भारतमाता केँ

    ज्यों शोणितकेँ चूसय जोंक

    सत्य-अहिंसा केर प्रेमीकेँ

    देखा रहल बन्दूकक नोक

    देस रहय अथवा डूबय

    एकरा हर्ष ने किछु शोक

    भऽ निराश ताकै छथि बाबा

    भेटय नहि किन्नहु आलोक

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 12)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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