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कोन एहन हम काज करू जे लागय

kon ehan hum kaaj karu je lagay

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

कोन एहन हम काज करू जे लागय

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    कोन एहन हम काज करू जे लागय कोनो पाप नहि

    भूखक आगिसँ बेसी भैया अछि कोनो संताप नहि

    रक्तबीज सन बढ़ल जाइ छै आइ मनुज संतान कोना

    जे खाली जनमेटा दै छै पापी अछि बाप नहि

    जे अपने टा स्वार्थ बुझै छै व्यर्थ ओतए उपदेश कोनो

    कारी कम्मलपर पड़तै पुनि आन रंगकेर छाप नहि

    ककरो रोटीपर आफत छै कतहु सड़ैए दूध मलाइ

    अपनहि कर्मकेर फल थिक पूर्वजन्मकेर श्राप नहि

    कर्महीन बनैछ प्राणी जे दोसर पर दोष मढ़य

    कार्यसिद्ध होइछ मेहनतिसँ बैसल कयने जाप नहि

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 10)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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