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आजकल हिंदोस्ताँ का रूप है बदला हुआ

ajkal hindostan ka roop hai badla hua

मनजीत भोला

मनजीत भोला

आजकल हिंदोस्ताँ का रूप है बदला हुआ

मनजीत भोला

और अधिकमनजीत भोला

    आजकल हिंदोस्ताँ का रूप है बदला हुआ

    मर गया गाँधी बेचारा, गोडसे ज़िंदा हुआ

    हर सियासी हाथ में है मज़हबी ख़ंजर यहाँ

    मुल्क़ ये सहमा हुआ है क्या हुआ ये क्या हुआ

    बात क्या करिए दिनों की साल काफ़ी हो चुके

    है रज़ा का चाँद अब भी नीम में अटका हुआ

    हर तरफ़ ख़ामोशियाँ हैं क्या हुआ इस शहर को

    आजकल चेहरा कोई दिखता नहीं हँसता हुआ

    पानियों के दाम बेशक बढ़ गए हैं देश में

    आदमी का ख़ून लेकिन और भी सस्ता हुआ

    नाज़ ने तख़्ती गढ़ी बस्ता बनाया नूर ने

    इस तरह ‘भोला’ मिरा इस्कूल में जाना हुआ

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनजीत भोला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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