आग मुसुकी से लगावल ना मुनासिब होई
aag musuki se lagaval na munasib hoi
ब्रजभूषण मिश्र
Brajbhushan Mishra
आग मुसुकी से लगावल ना मुनासिब होई
aag musuki se lagaval na munasib hoi
Brajbhushan Mishra
ब्रजभूषण मिश्र
और अधिकब्रजभूषण मिश्र
आग मुसुकी से लगावल ना मुनासिब होई
दियना बूतल बा, जरावल ना मुनासिब होई
अब कहीं बा कहाँ रजगज ऊ बगइचावाला
अबहूँ तितली के उड़ावल ना मुनासिब होई
रूप नारी के बा अखबार, पतिरिका, टी. वी.
एतना औरत के गिरावल ना मुनासिब होई
केहू जीतल, केहू हारल, का मिलल हमनी का
बेवजह जश्न मनावल ना मुनासिब होई
होश से काम लीं जनि जोश में आई झब से
मुफ्त जिनगी के गँवावल ना मुनासिब होई
- पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 75)
- संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
- प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
- संस्करण : 2003
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