मेहनतिया से जेकर जुटेला रोटिया
mehanatiya se jekar jutela rotiya
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
मेहनतिया से जेकर जुटेला रोटिया
mehanatiya se jekar jutela rotiya
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
मेहनतिया से जेकर जुटेला रोटिया।
भइया हउवऽ मजदूर तू हमार सथिया॥
खेत-खरिहान तू ही सड़क अउर दुकान में।
खटेलऽ तू घर छोड़ि कोइला खदान में॥
हउवऽ देशवा के तू अनमोल थतिया॥...
बरखा ना देखऽ नाहीं लागे तोहके घमवा।
मिलि जालऽ कतहूं करत तूहीं कमवां॥
तन पर कुरुता मइल बा फटल धोतिया॥...
नदिया के धार मोड़ि बन्हवां बनाव।
खेतवा के कोड़ि खनि अन्न उपजाव॥
तू तऽ हउवऽ समाज के नयन जोतिया॥...
मेहनति के जवन तोहार बहेला पसेनवां।
एक-एक बूंद सब बनि जाला सोनवां॥
नाहीं केहू से बा कम तोहार अवकतिया॥...
जब ले ना एक होइबऽ देश के मजूर तू।
शोषण तोहार होई रहबऽ मजबूर तू॥
अब होइजा बहादुर सब एक मतिया॥...
- पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 27)
- रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
- प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
- संस्करण : 2010
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