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उदासी

udasi

चानक मुँख देखु मलान भेल,

भऽ गेल आव रक्तभ क्षितिज,

दुरदिन मानक अनुमान भेल।

मुस्की मे हाड़क संदर्शन,

आनन पर रूपक भ्रम विशेष,

कहवैत रहल जे गालक तिल,

से साँपक विल वनि रहल शेष,

आँखिक तीरक विख पानि नोर वनि,

झहड़ल हृदय झमान भेल...

बुझलहुँ जकरा हम सुधा कोष,

पानिक फूटल घैल बनल,

कुहरैत अजर केँ जड़ल देखि,

सभ ज्योति स्वयम् मटमैल वनल,

रवसि रहल मनोरथ स्फुतनिक,

लूना अनेर हैरान भेल...

ककरा पर रूपसि करी आश,

कल्पो विटप बबूर भेल,

रोपल अमिसिंचित वर प्रवाल,

बढ़ि जेठक ठुट्ठ खजूर भेल,

जकरा छाया मे छलहुँ आइ ओ—

पुरना चार पलान भेल...

स्रोत :
  • पुस्तक : कलानिधि (पृष्ठ 115)
  • रचनाकार : कालीकान्त झा ‘बूच’
  • प्रकाशन : श्रुति प्रकाशन, नई दिल्ली
  • संस्करण : 2010

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