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उड़बै गे आसमानमे

uDabai ge asmanme

दीपिका चन्द्रा

दीपिका चन्द्रा

उड़बै गे आसमानमे

दीपिका चन्द्रा

और अधिकदीपिका चन्द्रा

    सुन गे सखिया...गे बहिना...

    किछु बात सुनाबै छी...

    हम सोचै छी...हम चलबै...आ बढ़बै...

    उड़बै गे आसमानमे...

    बाधा अबिते रहल छै...

    सदिखन अबिते जे रहतै...

    तकरा पार करत वैहटा...

    डेग बढ़बिते जे रहतै...

    जाधरि साँस ताधरि चलबै

    आगू जहानमे...

    हम सोचै छी...हम चल mबै...आ बढ़बै..

    उड़बै गे आसमानमे...

    लोक लाज बड़ केलियै...

    आब धियाकेँ ताज चाही न...

    डेग मिला सकी पुरुषोसँ...

    तेहेन समाज चाही न...

    मोनमे रखने विश्वास...

    गेबै गीत गुमानमे...

    हम सोचै छी...हम चलबै...आ बढ़बै...

    उड़बै गे आसमानमे....

    पढ़ि लिखिकय गे बहिना...

    पहिचान अपन बनेबै...

    लिखबै अपनेसँ भाग्य...

    कुल केर मान बढ़ेबै...

    रखने छी आँखिमे आस...

    जीबै छी एगो अरमानमे...

    हम सोचै छी...हम चलबै...आ बढ़बै...

    उड़बै गे आसमानमे...

    सिया जाहि धरती के धिया...

    पहुना जतय छै राम...

    जाहि धराक हमहूँ छी बेटी...

    जमे करबै गे नाम...

    दीपिका दीप बनि जरबै...

    अपन माटिक सम्मानमे...

    हम सोचै छी...हम चलबै...आ बढ़बै...

    उड़बै गे आसमानमे...

    स्रोत :
    • पुस्तक : चौकठिसँ चान दिस (पृष्ठ 93)
    • रचनाकार : दीपिका चन्द्रा
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2024

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