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टूटेला धिरिजा के तार

tutela dhirija ke taar

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

टूटेला धिरिजा के तार

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    चन्दा के संगवाँ रतिया चमके तरइया,

    सांवरगोरिया रे, ओइसे चमके सूरति तोहार।

    सांवरगोरिया रे…

    तोरे बीनु भइलीं हम जनमें के जोगिया—

    सांवरगोरिया रे, सूधि-बूधि बिसरे हमार।

    सांवरगोरिया रे…

    हिया में जरवलीं निसदिन असरा के दियना,

    सांवरगोरिया रे डोले लागलि बिरही बयार।

    सांवरगोरिया रे…

    पल-छिन कब ले तोहसे होइहें मिलनवाँ,

    सांवरगोरिया रे टूटेला धिरिजा के तार।

    सांवरगोरिया रे…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 41)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

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