तुम जो छोड़ गए फिर मन के आधे मौसम छूट गए
tum jo chhoD ge phir man ke aadhe mausam chhoot ge
अमन अक्षर
Aman Akshar
तुम जो छोड़ गए फिर मन के आधे मौसम छूट गए
tum jo chhoD ge phir man ke aadhe mausam chhoot ge
Aman Akshar
अमन अक्षर
और अधिकअमन अक्षर
तुम जो छोड़ गए फिर मन के आधे मौसम छूट गए
तुमको इस जीवन में साथी कुछ दिन और ठहरना था
हम दोनों बिछड़े सो हमको इसका सोग मनाना था
कुछ दिन एक-दूजे के संग में खुलकर हँसना गाना था
यूँ इस क़िस्से में मरकर अब अक्सर ऐसा लगता है
हमको अपनी प्रेम कथा से बचकर नाम कमाना था
हम मन की बातें एक दिन चेहरे पर लिखकर लाए थे
तुमको उन बातों में सारी दुविधाओं को पढ़ना था
अपना दुख लेकर एक दिन भी जग के पास नहीं आए
इतना जान गए थे हम भी जग को रास नहीं आए
एक ओर बरसते आँसू अब तो यादों का जंगल आगे
राम करे अपने हिस्से कोई वनवास नहीं आए
हम वनवासी होते भी तो युग के राम कहे जाते
तुमको सीता होने से एक बार मना तो करना था
- पुस्तक : एक लड़की (पृष्ठ 65)
- रचनाकार : अमन अक्षर
- प्रकाशन : हिन्द युग्म
- संस्करण : 2024
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