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सुख के दिन छोटे-छोटे से

sukh ke din chhote chhote se

मनोज जैन

मनोज जैन

सुख के दिन छोटे-छोटे से

मनोज जैन

और अधिकमनोज जैन

    सुख के दिन छोटे-छोटे से,

    दुख के बड़े-बड़े।

    सबके अपने-अपने सुख हैं,

    अपने-अपने दुखड़े।

    फीकी हँसी, हँसा करते हैं,

    सुंदर-सुंदर मुखड़े।

    रंक बना देते राजा को,

    दुर्दिन खड़े-खड़े।

    सुख के दिन छोटे-छोटे से,

    दुख के बड़े-बड़े।

    सबकी नियति अलग होती है

    दिशा दशा सब मन की।

    कोई यहाँ कुबेर किसी को,

    चिंता है बस धन की।

    समझा केवल वही वक़्त की

    जिस पर मार पड़े।

    सुख के दिन छोटे-छोटे से,

    दुख के बड़े-बड़े।

    हाँ यह तय है चक्र समय का,

    है परिवर्तनकारी।

    सबने भोगा सुख-दुख अपना

    चाहे हो अवतारी।

    अंत नही होता कष्टों का,

    जी हाँ बिना लड़े।

    सुख के दिन छोटे-छोटे से,

    दुख के बड़े-बड़े।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनोज जैन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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