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सून कइके गइलऽ स्याम हमरो भवनवाँ

soon kaike gailऽ syaam hamro bhavanvan

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

सून कइके गइलऽ स्याम हमरो भवनवाँ

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    (पूरबी)

    सून कइके गइलऽ स्याम हमरो भवनवाँ

    निरमोहिया भइलऽ साँवरू!

    तोहरो बतिया मतिया के मरलस

    इहे बाटे मन में घोराइल,

    तोहरो बंसिया सपनवाँ में बाजेला

    अगिया लगावे एही तनवाँ

    दरदिया देलऽ साँवरू!

    हमरो सुगनवाँ के भेंड़वा बनवलू

    कइसन बाटे तोहार टोना,

    कुबरो! तूँ भोगे ना पइबू

    हमरा घर के सोनवाँ

    महूरवा भइलऽ साँवरू!

    जवनी सुरतिया मन में बसल बा

    कवनो जतन से ना जाई,

    ऊधो, तूँ जाके कहिहऽ

    अइसहीं बिताइब उमिरिया

    सपनवाँ भइलऽ साँवरू!

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 121)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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