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सावन मास के अन्हरिया, त तिथिया दसमी रहे हो

savan maas ke anhariya, ta tithiya dasmi rahe ho

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

सावन मास के अन्हरिया, त तिथिया दसमी रहे हो

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    (उपन्यास-समाट् प्रेमचंद के इयाद में। तर्ज-सोहर)

    सावन मास के अन्हरिया, तिथिया दसमी रहे हो

    ललना, एकतिस जुलाई दिन सनीचर घर में अंजोर भइल हो।

    मुँसी अजायब के धनिया, धनिया आनंदी देवी हो

    ललना तीनो गो पुतरिअन के बाद, महल में पुतर भइल हो।

    घरवा में बाजेला बधइया लमही में सोर भइल हो

    ललना होरिला से बड़ कवन धनवां, धनपती नाँव भइल हो।

    बाबा नाँव धइलें धनपति, चाचा नवाब राय हो

    ललना अंगरेजी राज के जुलुमवां से प्रेमचंद नाँव भइल हो।

    बाबूजी डाक के मुलाजिम, गाँवा गाई धावत रहलें हो,

    ललना दुखवे में कटल लरिकइंया, नवाब ना 'नवाब' भइलें हो।

    सात बरिसके उमिरिया में भाई से बिछोह भइल हो

    ललना, मयभा मतरिया के बोलिया रोज के कलेवा भइल हो।

    जिनिगी में सुखवा सपनवां, दुःखवा पहाड़ अस हो

    ललना हथवा मे लिहलन कलमिया, पलनिया निहाल भइल हो।

    अंगरेजी राज के हिलवलन, देस के जगवलन हो,

    ललना दुखियन के भइलन सहइया, कलमिया तरुआर—भइल हो।

    पुसवा के रतिया में ठिठुरत, 'कफन' लिखत रहलें हो

    ललना 'गबन', 'गोदान' के सिरिजले दुनिया में नाँव भइल हो।

    होरी धनिया के बतिया, बिपतिया के रतिया नूँ हो

    ललना प्रेमचंद बाँटेलन अँजोरवा, पुरुबवा में भोर भइल हो।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 16)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 1993

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