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सपना सजावे आ गइल बा

sapna sajave aa gail ba

रमाकान्त मुकुल

रमाकान्त मुकुल

सपना सजावे आ गइल बा

रमाकान्त मुकुल

और अधिकरमाकान्त मुकुल

    गीत के लेके सहारा, गुनगुनाये गइल बा

    साँस निर्झर के निकल, संगीत बन लहरा गइल बा

    प्रेम में पागल पतंगा

    जब नियंत्रण रख सकल ना

    मन मन तन दीया के

    जोत से कुम्हिला सकल ना

    तूरिये देला छने में, लाज के बन्धन झटक के

    चोट जब लागल हिया पर, तब अधर मुस्का गइल बा

    ना नमी आवे शिला में

    हो भले बरसात कतनो

    ना मिटे पावे अँधेरा

    उगे जोन्ही पाँत कतनो

    रात भर चुपचाप जरते रह गइल दीपक अकेला

    बन्द अँखियन के उजाला, देख मन घवड़ा गइल बा

    आँख के सपना उड़ल ना

    मीत के ना साथ छूटल

    नाम पर अमृत के, विष जब

    पी गइल, ना आह फूटल

    प्रान साँसन में अँटक के, रह गइल ना निकल पावल

    नींद उचटल जान के, सपना सजावे गइल बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : आँचर के टुकड़ा (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : रमाकान्त मुकुल
    • प्रकाशन : भोजपुरी संस्थान, पटना
    • संस्करण : 2003

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